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Friday, June 17, 2011

sarwa dharm sambhaaw

भारत  भूमि  का  मूल  मन्त्र  है .....
सर्व धर्म  समभाव  |
विश्व  के  सारे  धर्म  यहाँ  पनपे , फूले , फले हैं
सभ्यता  ,संस्कृति  के  मार्ग यहाँ  से  चले  हैं  |
हमने कहा ....'धार्यते   इती  धर्मः '
स्व   स्व   कर्मः |
हम पंथों   , सम्प्रदायों  से  हैं  ऊपर ,
हमारा एक  है  ईश्वर  |
हम  उसी  के  बन्दे   हैं  ,
शेष  सब  गोरख  धंदे  हैं |
हम कहते 'वसुधैव  कुटुम्बकम '
सर्वप्रथम  मनुष्य  हैं   हम  |
           राज कुमार  सचान  'होरी'

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