भारत भूमि का मूल मन्त्र है .....
सर्व धर्म समभाव |
विश्व के सारे धर्म यहाँ पनपे , फूले , फले हैं
सभ्यता ,संस्कृति के मार्ग यहाँ से चले हैं |
हमने कहा ....'धार्यते इती धर्मः '
स्व स्व कर्मः |
हम पंथों , सम्प्रदायों से हैं ऊपर ,
हमारा एक है ईश्वर |
हम उसी के बन्दे हैं ,
शेष सब गोरख धंदे हैं |
हम कहते 'वसुधैव कुटुम्बकम '
सर्वप्रथम मनुष्य हैं हम |
राज कुमार सचान 'होरी'