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Friday, December 30, 2011
Sunday, November 27, 2011
1857 ke shaheed
अमर स्वतंत्रता सेनानी राजा जयलाल सिंह और राजा बेनी माधव
आज मेरी यात्रा हुयी १८५७ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दो अमर सेनानियों और शहीदों के ग्राम की ....राजा जय लाल सिंह और राजा बेनीमाधव .मेरे साथ थे ..श्री संतराम पटेल प्रदेश महा सचिव , श्री आर पी पटेल , श्री अम्बिका पटेल .सर्व प्रथम मिले रानी सावित्री देवी पत्नी स्वर्गीय राजा विन्देस्वरी प्रसाद सिंह से उनके निवास अतरौलिया , आजमगढ़ [उत्तर प्रदेश ] रानी जो इस समय लगभग ८० वर्ष की हैं , को अपने साथ लेकर गए उनकी रियासत ग्राम बौडरा जो अतरौलिया से मात्र कुछ किलोमीटर पर है और कभी इस रजवाड़े का शस्त्रागार था .
१८५७ के स्वतंत्रता के प्रथम युद्ध में लखनऊ में नवाब के सेनापति के रूप में अंग्रेजों से लोहा लिया था राजा जयलाल सिंह ,उनके भाई राजा रघुबर दयाल तथा उनके पिता राजा दर्शन सिंह ने .राजा जय लाल की वीरता और नेतृत्व के कारण लखनऊ में भीषण संग्राम हुआ जिसमे अनेकों बार अंग्रेज सेनाएं परास्त हुयीं . शहीद राजा जय लाल सिंह रानी लक्ष्मी बायीं ,नाना साहब और तात्या टोपे के साथ तालमेल कर युद्ध लड़ रहे थे . जयलाल सिंह को अंग्रेजों ने फांसी दी.इनका स्मारक पार्क लखनऊ में है .
अतरौलिया ,आजमगढ़ में इन शहीदों का कोई स्मारक नहीं है ,यह अफशोसजनक है . इनकी वंशावली रानी सावित्री से पूछ कर बनायीं जो निम्न प्रकार है ......
राजा गरीब दास
राजा दर्शन सिंह
[१]पहली रानी [२] मझली रानी [३] छोटी रानी
एक लड़की मात्र [१]रघुबर दयाल [२]फ़तेह बहादुर [१]राजा बेनी माधव [२]राजा जयलाल
[१]रामस्वरूप [२]राम प्रताप तेज प्रताप सिंह ठाकुर प्रसाद सिंह
[१]बिहारी प्रसाद [२]बद्री नारायण [१]नरसिंह [२]सतगुरु
[१]बिन्देस्वरी प्रसाद सिंह [१] खुनखुन सिंह
[१]राजेंद्र प्रताप सिंह
रानी श्री मती सावित्री सिंह जिनसे आज भेंट हुयी वह इन्ही बिन्देस्वरी प्रसाद सिंह की पत्नी हैं जिन्हें लखनऊ में अनेकों बार सम्मानित किया जा चूका है . उनके पुत्र राजेंद्र प्रताप सिंह गाँव में रह कर कृषि कार्य करते हैं . मुख्य मार्ग फैजाबाद आजमगढ़ से २ किलो मीटर स्थित अमर शहीदों के गाँव तक मात्र खडंजा है ,कंक्रीट मार्ग तक नहीं है . इस परिवार का यही दुःख है जो अंग्रेजों का साथ दे रहे थे उन्होंने इनकी भूमियों , सम्म्पत्तियों में कब्ज़ा कर लिया और आज समाज में सुविधाएँ भोग रहे है . इन्हें तो स्वतंत्रता सेनानी की सुविधाएँ तक नहीं .
राजेंद्र प्रताप सिंह से भेंट हुयी .उनके पांच पुत्र और पांच पुत्रिया हैं जो खेती में बस गुजर बसर कर रहे हैं .रानी सावित्री सिंह का mob ....9935435929
राज कुमार सचान 'होरी'
Wednesday, November 23, 2011
क्या आप पटेल टाईम्स पढ़ते हैं? आईये पढ़ें और लेख ,विचार और समाचार भेजें | हम प्रकाशित करेंगे | blog......pateltimes.blogspot.com eid......horisardaratel@gmail.com please send matters to eid above.
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Tuesday, November 22, 2011
MAHARAJGANJ GRAMIN BHRAMAN
महाराजगंज[यु.पी.] में ग्रामीण भ्रमण
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प्रसिद्ध साहित्यकार और सामाजिक चिन्तक अखिल भारतीय कुर्मिक्षत्रिय महा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पटेल राज कुमार सचान होरी जनपद महाराजगंज के दो दिवसीय भ्रमण में रहेंगे . ३ दिसंबर और ४ दिसंबर को चार तहसीलों में फैले ग्रामीण क्षेत्र में किसानों से जनसंपर्क कर उनकी कृषि ,परिवारिय समस्यायों पर चर्चा करेंगे .साथ में राष्ट्रीय महा सचिव श्री रामदेव पटेल और प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर विजय पटेल भी रहेंगे.इनके अतिरिक्त विश्राम चौधरी प्रदेश संगठन मंत्री , असोक पटेल प्रदेश महा सचिव , श्री कृष्ण चन्द्र वर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष भी दो दिवसीय दौरे में साथ रहेंगे .महा संघ के गोरखपुर मंडल के पदाधिकरी भी ग्रामीण भ्रमण करेंगे .महाराजगंज एक खेतिहर जिला है जहां पर कुर्मी समाज के किसानों की भारी संख्या है जिनमें से गरीब और पिछड़े किसानों की संख्या बहुत अधिक है.खेती का व्यवसायिक करण , शहरी रोजगार , सत्ता और साहित्य में भागीदारी पर किसान भाईयों से विमर्श किया जायेगा .जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों की उन्नति के लिए क्या कदम आवश्यक हैं इस पर गहन चिंतन किया जायेगा.
अपने गत भ्रमण में श्री होरी ने पाया था की यहाँ के लोगों में बहुत उत्त्साह है और उर्जा भी ,इन्हें राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में आसानी से लाया जा सकता है यदि गंभीर पहल की जाय ,इसीको धन में रख राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह दो दिवसीय ग्रामीण भ्रमण कार्यक्रम रखा है.
उक्त कार्यक्रम को लेकर जनपद में समाज के किसानों में भारी उत्साह है.कुर्मी किसानों के साथ ही श्री 'होरी' अन्य समाज के कुछ किसानों से भी मिलेंगे .
ब्युरोचीफ़ पटेल टाईम्स ,गोरखपुर
Thursday, October 27, 2011
भैया दूज मुबारक ***************** भाई की उन्नति , प्रगति के लिए , उसके स्वास्थ्य की कामना लिए , बहन करती है रोचना ,लगाती है टीका ..भाई के माथ | ताकि वह रहे हर पल भाई के साथ , सुख में , दुःख में .....पल पल ,हर पल साथ साथ जीवन भर | राज कुमार सचान 'होरी'
भैया दूज मुबारक
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भाई की उन्नति , प्रगति के लिए ,
उसके स्वास्थ्य की कामना लिए ,
बहन करती है रोचना ,लगाती है टीका ..भाई के माथ |
ताकि वह रहे हर पल भाई के साथ ,
सुख में , दुःख में .....पल पल ,हर पल साथ साथ
जीवन भर |
राज कुमार सचान 'होरी'
Wednesday, October 26, 2011
आयिये अब राष्ट्र में, दीप ऐसा हम जलाएं| मन के आँगन में बसे , हर घोर तम को हम भगाएं || रोलियां हर द्वार पर , आयिये हम मिल सजा दें , दीप के इस पर्व को हम, दीप उत्सव फिर मनाएं || राज कुमार सचान 'होरी'
आयिये अब राष्ट्र में, दीप ऐसा हम जलाएं|
मन के आँगन में बसे , हर घोर तम को हम भगाएं ||
रोलियां हर द्वार पर , आयिये हम मिल सजा दें ,
दीप के इस पर्व को हम, दीप उत्सव फिर मनाएं ||
राज कुमार सचान 'होरी'
Tuesday, August 30, 2011
RAJNEETI SE HI MILE
राजनीति से ही मिले , प्रजातंत्र का स्वाद |
'होरी' बिन सत्ता रहो , भिक्षुक से आबाद ||
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सत्ता औ साहित्य से , वर्ण उच्च हो जाय |
'होरी' कैसे , कब कहो , कौन इन्हें समझाय ||
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राजनीति से जो रहे , सदा दूर ही दूर |
'होरी' पिछड़े वे बने , सदियों से भरपूर ||
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राज कुमार सचान 'होरी'
Sunday, August 28, 2011
KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH: BE POLITICAL AND LITERARY COMMUNITY
KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH: BE POLITICAL AND LITERARY COMMUNITY: In India as a whole kurmis / kurmikshatriyas / patels etc etc are not basically political sensitive community . In whole country th...
Thursday, August 25, 2011
EK GAZAL APNON KE LIYE
एक ग़ज़ल अपनों के लिए ....
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[1] औरों की ओर ताकते कब तक युं रहोगे ,
'होरी' स्वयं के मध्य से नेता उभारिये |
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[२] गैरों की आरती तो उतारी है अब तलक ,
'होरी' सहोदरों की आरती उतारिये |
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[३] लड़ते रहे हैं आप सदा निज कुटुंब से ,
'होरी' अदावतों को तो, अब तो बिसारिये |
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[४] बीते हैं दिन बहुत, यह शिर नीचे किये हुए,
'होरी' जी अपने आप को, अब तो सम्हारिये |
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[5] आपस की रंजिशों का यह, शैतान जी लिया ,
'होरी' जी इस शैतान का , सर अब उतारिये |
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[६] गैरों के लिए अपनों को मारा है आपने ,
'होरी' इन अपनों को नहीं , अब और मारिये |
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राज कुमार सचान 'होरी'
Thursday, July 28, 2011
OM NAMAH SHIVAY [HORI KAVVYA SAGAR SE]
ओम नमः शिवाय [होरी काव्य सागर से ]
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देश में बढ़ती जाती दिनदिन, हिजड़ों की नव टोली |
हाव भाव हम उनके सीखे , सीख गए हैं , बोली ||
गंभीर समस्याओं के हल में , बजा रहे हैं ताली,
और उन्हीं की भाँति निकालें ..मुख से 'आय हाय' ||
ओम नमः शिवाय , ओम नमः शिवाय ||
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कभी गरीबी , कभी अशिक्षा , कभी धर्म की आड़ |
जनसँख्या के हम नित , नित , करते खड़े पहाड़ ||
भगवान की देन हैं बच्चे, कह पुनः शुरू हो जाते ,
बच्चे जनने की मशीन को, निश दिन रहे चलाय ||
ओम नमः शिवाय , ओम नमः शिवाय ||
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आँखों में पट्टी क्यों बाँधे , न्याय्कारिणी देवी ?
आँख की अंधी , गाँठ की पूरी , न्याय्धारिणी देवी ||
मनुज न्याय है मत्स्य न्याय क्यों बनता जाता दिन दिन?
चौराहों पर चर्चा क्यों है ? आज बिक रहा न्याय ||
ओम नमः शिवाय , ओम नमः शिवाय ||
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कहीं कसाब , कहीं पर अफज़ल, मिलते कहीं सईद |
भष्मासुर आतंकी करते मिट्टी , हिंद पलीद ||
पर भारत में जमें शिखंडी , युद्ध करें क्या खाक ,
अब आतंकवाद में हे शिव , तुम ही होउ सहाय ||
ओम नमः शिवाय , ओम नमः शिवाय
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राज कुमार सचान 'होरी'
Friday, June 17, 2011
sarwa dharm sambhaaw
भारत भूमि का मूल मन्त्र है .....
सर्व धर्म समभाव |
विश्व के सारे धर्म यहाँ पनपे , फूले , फले हैं
सभ्यता ,संस्कृति के मार्ग यहाँ से चले हैं |
हमने कहा ....'धार्यते इती धर्मः '
स्व स्व कर्मः |
हम पंथों , सम्प्रदायों से हैं ऊपर ,
हमारा एक है ईश्वर |
हम उसी के बन्दे हैं ,
शेष सब गोरख धंदे हैं |
हम कहते 'वसुधैव कुटुम्बकम '
सर्वप्रथम मनुष्य हैं हम |
राज कुमार सचान 'होरी'
Thursday, June 16, 2011
SANSKRATI
संस्कृति भारत वर्ष की , है प्राचीन महान |
'होरी' ध्याये ध्यान से , रख कर हिये सचान ||
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भारत षड दर्शन लिए , आठ अंग का योग |
'होरी' शाश्वत सत्य है , योग भगाए रोग ||
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चलो जातियां फेंक दें , सागर में अति दूर |
'होरी' उन्नति हो तभी , भारत में भरपूर ||
***********************************************
सत्य विजय होती सदा , भारत का सन्देश |
'होरी' करिए कर्म बस , चाहे कितना क्लेश ||
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raj kumar sachaan 'hori'
'होरी' ध्याये ध्यान से , रख कर हिये सचान ||
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भारत षड दर्शन लिए , आठ अंग का योग |
'होरी' शाश्वत सत्य है , योग भगाए रोग ||
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चलो जातियां फेंक दें , सागर में अति दूर |
'होरी' उन्नति हो तभी , भारत में भरपूर ||
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सत्य विजय होती सदा , भारत का सन्देश |
'होरी' करिए कर्म बस , चाहे कितना क्लेश ||
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raj kumar sachaan 'hori'
Wednesday, June 15, 2011
dohe dardasan
भारत दर्शन श्रेष्ठतम , विश्व बन्धु सन्देश |
वसुधा एक कुटुंब सम , यह दर्शन उपदेश ||
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यह तू , यह मैं , कुछ नहीं , हम सब मनुज समान |
'होरी' जगती एक सब , हम सब एक सचान ||
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काश्मीर सा स्वर्ग है , गंगा सरित महान |
हिंद महासागर चरण , धोये सदा सचान ||
राज कुमार सचान 'होरी'
Tuesday, June 14, 2011
bhartiya soch
भारत की सोच सदा वसुधैव कुटुम्बकम की रही है . जिओ और जीने दो की धरती में किसी तानाशाह का स्थान कभी नहीं रहा . क्या हम लोकपाल को सर्वशक्तिमान तानाशाह बना एंगे . नहीं
Monday, June 13, 2011
bharat vandana
मात्रि भूमि को वन्दना , 'होरी' सौ सौ बार |
जिऊँ मरूं , पुनि जन्म लूं ,भारत में हर बार ||
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